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ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

परमाणु समझौताः क्या खोया क्या

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:45 GMT-0000
अमरीकी प्रतिनिधि सभा में भारत-अमेरिका नाभिकीय समझौते के संबंध में जिस तरह के विधेयक पर विचार हो रहा था उसपर अंततः प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने भी कह दिया कि उसकी कुछ बातें भारत के लिए चिंतनीय थीं। राज्य सभा में उनके इस बयान के कुछ ही समय बाद अमरीकी प्रतिनिधि सभा ने इसे भारी बहुमत से पारित कर दिया।
ज्ञान पाठक के अभिलेखागार से

असली देशप्रेमियों की जान पर

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:43 GMT-0000
समय - स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या। अवसर - भारत के राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा देश के कुछ विशेष लोगों के लिए एक प्रीतिभोज का आयोजन। इस अवसर पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन। आकाशवाणी के कलाकारों द्वारा कारगिल के जवानों पर स्वयं श्री कलाम की लिखी कविता का हिंदी में गायन। देशप्रेम का ऐसा माहौल कि कोई भी देशभक्त रोमांचित हो उठे।
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पाठक रपट के पहले और उसके बाद

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:40 GMT-0000
खनिज तेल के बदले खाद्यान्न वाले संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम के तहत भारत के नेताओं, उनके सगे संबंधियों और चहेतों ने लाभ उठाया, जो स्पष्ट है। लेकिन दुखद पहलू यह है कि उनकी ऐसी जांच कभी नहीं करायी गयी जिसपर उंगलियां न उठायी जा सकें।

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देशद्रोही ‘भेदिये’ के जिक्र

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:38 GMT-0000
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह की किताब “A Call to Honour – In Service of Emergent India” में देशद्रोही ‘भेदिये’ का जिक्र क्या आया कि इस सिंह का मुंह नोचने को झपट पड़े हैं दूसरे सिंह ‘मनमोहन सिंह’। आखिर भारत के प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह इससे परेशान क्यों हैं? जसवंत सिंह ने उस देशद्रोही का नाम अब तक क्यों नहीं बताया?
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संविधान की धज्जियां ...

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:35 GMT-0000
भारत की जनता को अपनी बात सीधे तौर पर रखने, अपने लिए योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार भारत की आजादी के समय भी नहीं मिला था, और दिसम्बर 1992 में उन्हें यह अधिकार दो संविधान संशोधनों के बाद मिला भी तो अब तक इनकी मूल भावनाओं को तो छोड़ दें, शब्दों में लिखे प्रावधानों की भी धज्जियां उड़ायी जाती रही हैं।
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“लाभ के पद” का विवादित विधेयक

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:32 GMT-0000
“लाभ के पद” का विवादित विधेयक गुरुवार को एक बार फिर राज्य सभा में ज्यों का त्यों पारित कर दिया गया। अब इसे लोक सभा में रखा जाना है। वहां भी इसके पारित हो जाने की संभावना है क्योंकि कांग्रेस के नेतृत्व वाली वर्तमान संप्रग सरकार का ही वहां बहुमत है जिसके मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को ज्यों का त्यों राष्ट्रपति के पास वापस भेजने का निर्णय कर रखा है।
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भारत का विदेशी ऋण

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:28 GMT-0000
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के नियमों का अनुपालन करते हुए भारत सरकार देश के विदेशी ऋण के संदर्भ त्रैमासिक ताजी स्थिति मार्च महीने के अंत तक जारी करेगी, हालांकि बजट 2007-08 में इसकी एक झांकी मिल जायेगी। अब तक की प्राप्त जानकारी के आधार पर कहा जा सकता है कि भारत एक गंभीर चक्रव्यूह में फंसने की दिशा में बढ़ रहा है।
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मरते बच्चे, दोषी माताएं

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:26 GMT-0000
भारत की माताएं यदि सावधानी बरततीं और अपने नवजात शिशुओं को स्तनपान करातीं तो प्रत्येक साल मरने वाले 24 लाख बच्चों में से 15 प्रति शत की जानें बच जातीं, विशेषकर यदि स्तनपान कराने के सामान्य व्यवहार को वांछित 90 प्रति शत तक के स्तर तक ले जाया जाता।

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बुरे लोगों से साठगांठ ...

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:22 GMT-0000
एन एन वोहरा समिति की उस रपट के सरकारी ताक पर रखे जाने के लगभग अब एक दशक हो जायेंगे जिसमें कहा गया था कि अधिकारियों-राजनीतिज्ञों-अपराधियों के बीच एक साठगांठ है। उन्होंने किसी का नाम नहीं बताया था और अब तक किसी भी सरकार ने उन लोगों को बेनकाब कर दंडित करने की कोशिश नहीं की।
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केन्द्रीय बजट में खेती-बारी

Author: System Administrator - Published 20-10-2007 05:20 GMT-0000
केन्द्रीय मंत्री पी चिदम्बरम ने संसद में अपने बजट भाषण में जब कृषि क्षेत्र पर बोलना प्रारंभ किया तो सबसे पहले भारत के लिए कृषि को ही प्रमुख चुनौती बताया। उन्होंने भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरु की एक उक्ति सामने रखी कि “सब कुछ इंतजार कर सकता है लेकिन खेती नहीं।”