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जनोपयोगी बजट ही आम आदमी को राहत दे पायेगा

Author: डाॅ. भरत मिश्र प्राची - Published 19-01-2018 13:29 UTC

केन्द्र सरकार फरवरी माह में आम बजट लाने की तैयारी कर रही है। यह बजट इस सरकार के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण रहेगा। इस वर्ष देश के अधिकांश भाग में विधानसभा चुनाव है और उनमें से ज्यादा में भाजपा की सरकार क्रियाशील है। आगामी वर्ष में लोकसभा के चुनाव भी होने है । गुजरात चुनाव उपरान्त देश का हर चुनाव केन्द्र की भापजा शासित सरकार के लिये चुनौती बना हुआ है। केन्द्र की नई आर्थिक नीति के तहत जारी बैंक नीति एवं जीएसटी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के ज्यादा आसार बनते दिखाई दे रहे है, जिसके लिये केन्द्र सरकार आंतरिक मन से ज्यादा चिंतित नजर आ रही है। बजट में इस गंभीर मुद्दे को लेकर चर्चा हो सकती है। एक तरह से यह चुनावी बजट भी हो सकता है जहां सरकार आम आदमी को विशेष राहत देने की भरपूर कोशिश करेगी पर बजट में आम आदमी को कितना राहत वर्तमान सरकार दे पायेगी, बजट उपरान्त ही पता चल पायेगा ।

हज सब्सिडी हटाकर अच्छा किया

अन्य सभी तीर्थयात्राओं से भी सब्सिडी हटा लेनी चाहिए
Author: उपेन्द्र प्रसाद - Published 18-01-2018 11:58 UTC

सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में यह आदेश दिया था कि मुसलमानों को हज यात्रा में दी जाने वाली सब्सिडी को 2022 तक पूरी तरह समाप्त कर दिया जाय। मोदी सरकार ने इस 2018 से ही समाप्त कर दिया। यह निर्णय एकाएक नहीं हुआ है, बल्कि पिछले साल ही यह बता दिया गया था इस साल से हज यात्रा के लिए दी जाने वाली सब्सिडी पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। सरकार का दावा है कि सब्सिडी समाप्त करने से 700 करोड़ रुपये की बचत होगी और उसे मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा।

आधार आथोरिटी का चेहरा नहीं बदला

भारत की छवि को नुकसान
Author: के रवींद्रन - Published 17-01-2018 11:21 UTC

यूनिक आइडेंटिफिकेशन आथोरिटी आफ इंडिया की छवि कभी अच्छी नहीं रही। इसे चलाने वाले बाबू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में अठारहवीं सदी का तर्क इस्तेमाल करते हैं। इसलिए वह जो करना चाहते हैं और जो करते हैं उसमें कोई मेल नहीं होता है। संस्था के नाम की तरह उनका काम भी विचित्र ही है।

ऐसे तो अपना बचा-खुचा जनाधार भी गंवा देगी कांग्रेस

‘नरम हिन्दुत्व’ की राजनीति उसे डुबा देगी
Author: अनिल जैन - Published 17-01-2018 11:18 UTC

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस इन दिनों अपने जीवन के सबसे चुनौती भरे दौर से गुजर रही है। देश की आजादी के बाद लगभग चार दशक तक (ढाई साल के जनता पार्टी के दौर को छोडकर) केंद्र के साथ ही देश के अधिकांश राज्यों में लगभग निर्बाध रूप से सत्ता पर काबिज रही यह पार्टी आज केंद्र शासित प्रदेश समेत महज पांच अपेक्षाकृत छोटे राज्यों में सिमटकर रह गई है। लोकसभा में उसकी सदस्य संख्या महज 46 है।

भाजपा का धार्मिक धु्रवीकरण ही सहारा

कर्नाटक भी गुजरात के रास्ते पर
Author: अनिल सिन्हा - Published 16-01-2018 11:08 UTC

जहां तक चुनाव के मुद्दों का सवाल है, कर्नाटक गुजरात के रास्ते पर है। तीन-चार महीनों के भीतर चुनाव में जा रहे इस राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी के लिए असली मुद्दा यही है कि हिंदुओं का नेतृत्व कौन करे। भाजपा का रवैया साफ है कि हिंदुत्व को ही अपना हथिार बनाएगी। कांग्रेस की ओर से भी जो जवाब आ रहे हैं उसकी ध्वनि गुजरात के ‘नरम हिंदुत्व’ वाली आवाज से मिलती-जुलती है। लेकिन कर्नाटक के सामाजिक बनावट के हिसाब से कांग्रेस के लिए यह मुश्किल होगा कि वह नरम हिंदुत्व के रास्ते पर अधिक दूर तक बढ़ सके। इसकी वजह है कर्नाटक में मुसलमानों की आबादी का 16 प्रतिशत होना। गुजरात में मुसलमानों की आबादी सिर्फ 9 प्रतिशत है।

भारत में शासन-प्रणाली में बदलाव की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट की ईमानदारी तथा विश्वसनीयता दांव पर
Author: ज्ञान पाठक - Published 15-01-2018 12:01 UTC

भारत की शासन प्रणाली के तीन हिस्सों-कार्यपालिका, विधायिका तथा न्याययापालिका के ईमानदार तथा निष्पक्ष होने को लेकर आम तौर पर विश्वास है। विधायिका के सदस्यों, कार्यपालिका में बड़े ओहदे पर बैठे अधिकारियों तथा मंत्रियों और न्यायपालिका के जजों की अनियमिताओं और अन्याय के सामने पूरी तरह लाचार है। लोगों को अन्याय के खिलाफ सीमित उपचार था, और उनमें से कई पूरी तरह असहाय हैं, यह सच्चाई बाहर आ गई है और मुख्य न्यायाधीश के ठीक नीचे के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने इसे प्रेस के सामने स्वीकार किया है। उन्होंने यहां तक आारोप लगाया कि ‘न्यायालय के नियमों की अवहेलना कर मुकदमे पसंदीदा खंडपीठों को सौंपे जाते हैं।’ यह भारत में पहली बार हुआ है कि कार्यपालिका के ‘असली मुखिया‘ और ’न्यायपालिका के ’वास्तविक प्रधान’ दोनों के पर ’परंपराओं तथा मानदंडों’ के खिलाफ अपनी मनमर्जी से काम करने के आरोप हैं।

केरल की बदलती राजनैतिक तस्वीर

यूडीएफ का नुकसान एलडीएफ का लाभ है
Author: पी श्रीकुमारन - Published 15-01-2018 11:56 UTC

तिरुवनंतपुरमः कांग्रेस नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) से अलग होने का जनता दल (यूनाईटेड) ने फैसला कर लिया है। अब उसके सीपीआई (एम) नेतृत्व वाले वाम लोकतांतत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) में शामिल होने से केरल की राजनीतिक तस्वीर बहुत तेजी से बदलेगी। एलडीएफ खेमे में इसको लेकर खुशी का माहौल है। जद (यू) के लिए, यह आठ साल के अंतराल के बाद घर वापसी का मामला है।

क्या पीयू सर्वे भरोसे लायक है?

भारतीय मीडिया अमेरिकी मीडिया से ज्यादा निष्पक्ष
Author: सुशील कुट्टी - Published 14-01-2018 12:00 UTC

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मीडिया से युद्ध चल रहा है और फर्जी मीडिया तथा फर्जी खबरें ही आज की खबर हैं। ऐसे में, एक छोटी से खबर है जो ‘‘फर्जी खबर’’ मालूम देती है और प्रसारित हो रही है। यह है भारत के मुख्यधारा मीडिया कीे खबरों के ‘‘निष्पक्ष और वास्तविकता पर आधारित’’ पर होने की खबर।

सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम संकट

न्यायपालिका की विश्वसनीयता खतरे में
Author: उपेन्द्र प्रसाद - Published 14-01-2018 11:57 UTC

देश की न्यायपालिका के लिए पिछले 12 जनवरी का दिन एक दुर्भाग्यपूर्ण दिवस के रूप में ही देखा जाएगा, क्योंकि उस दिन सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने प्रेस कान्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के जज पर कुछ बहुत ही गंभीर आरोप लगाए। आरोपों की गंभीरता तो अपनी जगह पर है, चार जजों का सुप्रीम कोर्ट के अंदर के प्रशासनिक हालातों पर असंतोष जताते हुए मीडिया से मुखातिब होना अपने आपमें एक अभूतपूर्व घटना थी। ऐसा आजतक हमारे देश में नहीं हुआ था। हम चाहेंगे कि आगे इस तरह का कोई मौका नहीं आए।

जम्मू-कश्मीर नगर निकाय चुनाव

घाटी में लोकतंत्र एक बार फिर कसौटी पर
Author: जय भगवान - Published 12-01-2018 09:27 UTC

आखिरी बार जब जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए तो भारी हिंसा हुई और मेहबूबा मुफ्ती नेतृत्व वाली सरकार को अनंतनाग निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव रद्द करना पड़ा।

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