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दिल्ली का दंगा एक सुनियोजित साजिश

वह कौन है जो देश को बदनाम करना चाह रहा है
Author: उपेन्द्र प्रसाद - Published 25-02-2020 17:26 GMT-0000
उधर गुजरात में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्वागत में लगे हुए थे और ट्रंप भारत की बड़ाई करते हुए कह रहे थे कि यह बहुत ही सुरक्षित देश है और यहां के लोग बहुत ही शानदार होते हैं, ठीक उसी समय दिल्ली में दंगा भड़क रहा था। आगजनी हो रही थी। पत्थरबाजी ही नहीं गोलीबारी तक हो रही थी। और वह सब पुलिस के सामने ही हो रहा था। पुलिस आधे अधूरे मन से अपना फर्ज निभा रही थी। शायद वह अपना फर्ज निभा भी नहीं रही थी, बल्कि निभाने का नाटक कर रही थी। ऐसे विडियो देखे गए हैं, जिनमें पुलिस के पास के ही लोग पत्थरबाजी कर रहे थे और पुलिस खड़ी तमाशा देख रही थी।

मायावती का राजनैतिक अवसान

क्या चन्द्रशेखर रावण ले पाएंगे उनकी जगह?
Author: उपेन्द्र प्रसाद - Published 24-02-2020 10:54 GMT-0000
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे को लोग आम आदमी पार्टी की विजय, भारतीय जनता पार्टी की हार और कांग्रेस के सफाए के रूप में ही देखते हैं, लेकिन इस चुनाव को बसपा प्रमुख मायावती की राजनीति के अवसान के रूप में भी देखा जाना चाहिए। मायावती ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे और उनके सभी उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हो गईं। सिर्फ जमानतें ही नहीं जब्त हुईं, बल्कि अंधिकांश सीटों पर तो बसपा उम्मीदवारों को 1000 से भी कम वोट मिले।

दिल्ली में केजरीवाल की सफलता से ममता ने सबक ली

बंगाल सरकार ने केंद्र विरोधी हमले को नर्म किया
Author: आशीष विश्वास - Published 22-02-2020 13:47 GMT-0000
दिल्ली चुनावों में केजरीवाल की शानदार जीत के बाद, ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र के साथ अपने व्यवहार में एक सामरिक बदलाव किया है। अब से, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विरोध की अपनी नीति को तृणमूल कांग्रेस सावधानी से लागू करेगी और उसकी कोशिश टकराव से हटकर नर्म रुख अपनाने की होगी। विशेष रूप से केंद्र-राज्य संबंधों के मामले में इस पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।

कर्नाटक के बीदर में सेडिशन कानून का भारी दुरुपयोग

बच्चों के मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन
Author: एल. एस. हरदेनिया - Published 22-02-2020 13:44 GMT-0000
इस समय हमारे देश मेें देशद्रोह (सेडिशन) कानून का जबरदस्त दुरूपयोग हो रहा है। ऐसा ही एक मामला हाल में कर्नाटक में हुआ है। कर्नाटक के बीदर नामक नगर के एक स्कूल में एक नाटक खेला गया था। नाटक मेें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) की आलोचना की गई थी। इस मुद्दे को लेकर स्कूल और उसके शिक्षकों पर सेडिशन कानून जड़ दिया गया और कई शिक्षकों और छात्रों के अभिभावकों को गिरफ्तार कर लिया गया। जिन्हें गिरफ्तार किया गया उनमें 9 वर्ष की एक छात्रा की मां नजमुनीसा भी शामिल थी। नजमुनीसा को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उसकी 9 साल की बेटी ने नाटक मेें सीएए के खिलाफ कुछ बातें कहीं थीं। स्कूल की प्रधानाध्यापिका फरीदा बेगम भी गिरफ्तार की गईं। दोनों को 17 दिन बाद जेल से रिहा किया गया। इन 17 दिनों के दौरान इस बच्ची को अपनी मां से अलग रहना पड़ा। बच्ची के पिता नहीं हैं इसलिए उसका लालन-पालन उसकी मां ही करती है। नजमुनीसा अपनी बेटी के साथ एक किराए के मकान मे रहती है। इन सत्रह दिनों के दौरान यह बच्ची मकान मालिका के कमरे में सोती थी। बच्ची ने पत्रकारों को बताया कि इन सत्रह दिनों में वह एक भी रात सो नहीं पाई। ‘‘मैं रात भर रोती रहती थी और सोचती रहती थी कि मेरी मां क्या कभी भी जेल से छूट पाएगी। जिस दिन मुझे पता लगा कि मेरी मां जेल से छूटने वाली है उस दिन मैं सोचती रही कि ज्योंहि मेरी मां बाहर आएगी मैं उसे गले लगाऊंगी और उसे खूब चूमूंगी।"

भारत और पाकिस्तान गरीबी के विरुद्ध छेड़ें जंग, आपस में नहीं

नाशपाती स्वास्थ्य राष्ट्र के निर्माण के लिए आवश्यक है
Author: डॉ अरुण मित्रा - Published 20-02-2020 12:14 GMT-0000
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेतावनी दी कि भारत दस दिनों से भी कम समय में पाकिस्तान को हरा सकता है। इसी तरह के ओवरटोन को पाकिस्तानी नेतृत्व और सेना से बार-बार सुना गया है, जिन्होंने दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति में परमाणु हथियारों का उपयोग करने की चेतावनी भी दी है। भारत एक बड़ा देश है और कोई आश्चर्य नहीं कि पाकिस्तान से पारंपरिक हथियारों के मामले में हमारी श्रेष्ठता है। हमारी सेना बहुत अधिक अनुशासित है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमान में है। हमने अतीत में अनेक युद्ध जीते हैं। हमें 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के मानवीय संकट को सुलझाने के लिए युद्ध लड़ना पड़ा। यह तब हुआ जब तत्कालीन पाकिस्तान सरकार के दमनकारी शासन द्वारा पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को बर्बरता से मारा जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तब से अब तक बहुत कुछ बदल गया है।

दिल्ली चुनाव के आइने में कांग्रेस का भविष्य

अभी भी इसे बचाया जा सकता है
Author: उपेन्द्र प्रसाद - Published 19-02-2020 10:43 GMT-0000
दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत हुई और भारतीय जनता पार्टी की हार हुई, लेकिन आज ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि कोई यह नहीं कह रहा कि यहां कांग्रेस की हार हा गई है। कारण स्पष्ट है, उसकी हार चर्चा का विषय होती है, जिसकी जीत की उम्मीद थी, लेकिन कांग्रेस की जीत की तो कोई उम्मीद ही नहीं थी। देश की सबसे बड़ी पार्टी के लिए चुनावी आशावाद सिर्फ इसको लेकर ही था कि शायद कांग्रेस अपना खाता खोल ले। यदि कांग्रेस को वास्तव में एक सीट भी मिल जाती तो कुछ कांग्रेस नेता खुश होकर बोलते कि खाता खुल जाना ही उनकी जीत है। लेकिन दिल्ली की जनता ने संतोष करने के लिए कांग्रेस को एक सीट तक नहीं दी।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस का गुटीय संघर्ष जारी

कमलनाथ के हाथों अपमानित महसूस कर रहे हैं सिंधिया
Author: एल एस हरदेनिया - Published 18-02-2020 13:04 GMT-0000
भोपालः बीजेपी ने आखिरकार मध्यप्रदेश के लिए अपना अध्यक्ष चुन लिया है, लेकिन कांग्रेस अभी भी इस मुद्दे को सुलझा नही पा रही है। इस बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच दरार लगातार बढती जा रही है और एक दूसरे के खिलाफ दोनों के तेवर तल्ख होते जा रहे हैं।

भारत के लिए चीन का एटीआर ब्रेक

Author: के रवीन्द्रन - Published 17-02-2020 11:23 GMT-0000
थोड़ा डराने के बाद, घरेलू पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। यह निश्चित रूप से मोदी सरकार के लिए सांत्वना का एक बिंदु है, जो सभी संभावित आर्थिक मोर्चों पर परेशानी का सामना कर रही है।

बोडो समझौते खड़े कर सकते हैं असुविधाजनक सवाल

बीजेपी को असम में नहीं हो पाएगा राजनैतिक लाभ
Author: बरुन दास गुप्ता - Published 15-02-2020 11:08 GMT-0000
पिछले महीने के अंत में केंद्र ने असम में कई आतंकवादी समूहों केे साथ एक और शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इनमें नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड, राभा नेशनल लिबरेशन फ्रंट, कामतापुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन, नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ बंगालिज शामिल हैं। इनमें से अधिकांश कागजी संगठन थे जिनके पास समस्या पैदा करने की बहुत कम ताकत थी। यह भी अच्छी बात है कि 644 आतंकवादियों ने गुवाहाटी में आत्मसमर्पण कर दिया था। रिपोर्टों से पता चलता है कि उनमें से लगभग सभी ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया|

आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अनुचित

सामाजिक न्याय के लिए एक बड़ा झटका है
Author: डी राजा - Published 14-02-2020 11:29 GMT-0000
अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) को नौकरियों और शिक्षा में संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के आधार पर आरक्षण दिया जाता है ताकि जाति की वजह से भेदभाव, असमानता और अभाव की समस्याओं को दूर किया जा सके।