Loading...
 

रोहिंग्या एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है

इसे सुलझाने के लिए भारत को पहल करनी होगी
Author: उपेन्द प्रसाद - Published 22-09-2017 12:18 UTC

रोहिंग्या की समस्या बद से बदतर रूप ले रही है और इधर भारत में इस पर गंदी राजनीति हो रही है। आज जरूरत इस बात की है कि भारत इस समस्या हो हल करने के लिए कोई ठोस पहले करे, लेकिन सरकार सिर्फ इस बात पर अड़ी है कि यहां आए हुए शरणार्थियों को वापस भेज दिया जाएगा। अब तो केन्द्रीय गृह मंत्री ने उन रोहिंग्या शरणार्थियों को शरणाथी मानने से भी इनकार कर दिया है और उन्हें घुसपैठिया कह रहे हैं।

अप्रासंगिक बन चुका है महिला आरक्षण का मुद्दा

क्या शीत्र सत्र में पास हो पाएगा यह?
Author: भरत मिश्र प्राची - Published 21-09-2017 12:08 UTC

जब जब इस देश में संसदीय सत्र शुरू होता है हर बार महिला आरक्षण का मुद््दा जोर - शोर से उछलता है, पर पुरूष प्रधान लाॅबी वाले इस देश में टाॅय - टाॅय फिस हो जाता है। इस बार फिर शीतकालीन सत्र से पूर्व वर्तमान केन्द्र की नरेन्द्र मोदी के नेतृृत्व में एन.डी. ए.. सरकार द्वारा संसद में महिला आरक्षण का मुद््दा लाने व इसे पारित कराने की चर्चा जोर - शोर पर है। उसे संसद में पारित कराने का पूर्व में कांग्रेस की ओर से भी पूरी कोशिश जारी रही एवं श्रीमती सोनियां गांधी द्वारा महिला दिवस पर पूर्व से ही इसे उपहार के रुप में जानने के क्रम में संसद में पूर्ण बहुमत वाली कांग्रेस से इस बिल को संसद में पारित हो जाने की पूरी उम्मीद भी की जा रही थी पर उस समय भी पुरुष लाॅबी स्वयं भूपरिवेश के कारण बिल पारित न हो सका और आज तक यह मुद्दा अप्रासंगिक बना हुआ है।

संयुक्त राज्य अमेरिका

हिलेरी क्लिंटन ने अपनी हार का कारण गिनाया

डेमोक्रेटिक नेता में अभी भी ध्रुवीकरण की ताकत
Author: कल्याणी शंकर - Published 20-09-2017 18:10 UTC

राष्ट्रपति चुनाव हारने के 10 महीनों के बाद हिलेरी क्लिंटन एक बार फिर मीडिया की सुर्खियों में हैं। इसका कारण उनके द्वारा लिखी गई एक किताब है। 494 पृष्ठों की इस किताब में हिलेरी ने राष्ट्रपति चुनाव का अपना विश्लेषण लिखा है। इसमें उन्होंने अपनी हार के कारणों की समीक्षा की है। नई किताब आने के बाद एक बार फिर अमेरिकी समाज में विभाजन देखने को मिल रहा है। कुछ लोग हिलेरी के पक्ष में खड़े हैं, तो कुछ लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं।

क्या इसी तरह बनेगा मोदी का न्यू इंडिया?

गौरी लंकेश की हत्या और उसके बाद
Author: अनिल जैन - Published 20-09-2017 18:06 UTC

‘अगर सत्ताधारी ताकतें गलत हों तो लोगों का सही होना खतरे से खाली नहीं होता’- फ्रांस के क्रांतिकारी दार्शनिक वॉल्टेयर का यह कथन हमारे देश के मौजूदा माहौल पर शत-प्रतिशत लागू प्रतीत होता है। सरकार की नीतियों से असहमत पत्रकारों, लेखकों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, तर्कवादियों, आदि की सत्तारूढ दल के समर्थकों द्वारा हत्या, उन पर जानलेवा हमलों और उन्हें धमकाने का सिलसिला बना हुआ है। गाय को बचाने और खानपान के नाम पर भी कहीं मुसलमानों को मारा जा रहा है तो कहीं दलितों को। ऐसा नहीं है कि इस तरह की घटनाएं भाजपा के सत्ता में आने से पहले नहीं होती थीं या भाजपा जब सत्ता में नहीं होगी तब इस तरह की घटना रूक जाएंगी। लेकिन पिछले तीन-चार वर्षों से देश में सांप्रदायिक और जातीय वैमनस्य, नफरत और हिंसा का जो माहौल सत्ता के अघोषित संरक्षण में बनाया जा रहा है, वह अभूतपूर्व है।

रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या

विश्व समुदाय को इसे हल करना चाहिए
Author: एल.एस. हरदेनिया - Published 18-09-2017 12:46 UTC

म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों के निष्कासन ने अनेक महत्वपूर्ण प्रश्नों को जन्म दिया है। इस संदर्भ में सबसे बड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि किसी देश की सरकार मनमाने ढंग से यदि वहां बरसों से बसे नागरिकों को देश निकाला कर दे तो वे कहां जाएं?

औषधि के रूप में गोमूत्रः हकीकत या अफसाना?

Author: डाॅक्टर अरुण मित्र - Published 16-09-2017 10:00 UTC

मनुष्य द्वारा गोमूत्र पीने के फायदों की चर्चा सदियों से होती रही है, लेकिन पिछले तीन साल जब से नरेन्द्र मोदी की सरकार केन्द्र में बनी है, इस पर चर्चा कई गुना ज्यादा हो गई है। हम जिस भी चीज को खाएं या पीएं उसके बारे में हमें पूरी तरह निश्चिंत हो जाना चाहिए कि उससे कोई नुकसान नहीं है और यदि किसी चीज को औषधि बताई जा रही हो, तो उसके बारे में भी पूरी तरह से सबूत प्राप्त कर लेनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने जनआंदोलन की योजना बनाई

जमीनी स्तर पर विश्वास पैदा करने की कोशिश
Author: प्रदीप कपूर - Published 15-09-2017 13:06 UTC

लखनऊः प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने कांग्रेस में फिर से आत्मविश्वास पैदा करने के लिए आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। इसके तहत प्रदेश भर में राजनैतिक अभियान छेड़कर लोगों की समस्यााओं के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

क्या भाजपा से दूर हो रही है दिल्ली?

विश्वविद्यालय छात्रसंघों के चुनावी नतीजे मोदी के लिए अशुभ
Author: उपेन्द्र प्रसाद - Published 14-09-2017 11:57 UTC

लगता है दिल्ली भारतीय जनता पार्टी से दूर होती जा रही है। पहले बवाना विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। वहां भाजपा ने दलबदल कराकर आम आदमी पार्टी के एक विधायक को पार्टी में मिला लिया था और उसे ही अपना उम्मीदवार भी बनाया था। दिल्ली नगर निगम के चुनाव में शानदार विजय प्राप्त करने के बाद भाजपा को वहां जीत बहुत आसान लग रही थी। कुछ दिन पहले ही हुए नगर निगम के चुनाव में बवाना विधानसभा क्षेत्र के पड़ने वाले 6 वार्डों में भाजपा को 4 में जीत हासिल हुई थी, लेकिन विधानसभा के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी न केवल हार गई, बल्कि मतगणना समाप्त होने के कुछ पहले तक कांग्रेस उम्मीदवार से भी पिछड़ते हुए तीसरे स्थान पर आती दिख रही थी और जीत के लिए नहीं, बल्कि किसी तरह दूसरे स्थान पर आने के लिए भाजपा के समर्थक मनौती मांग रहे थे। बहरहाल, मतगणना समाप्त होने तक वे दूसरे स्थान पर आ गए।

भाजपा ने कैबिनेट विस्तार में अपने सहयोगियों को बाहर रखा

राजग सहयोगी सलाह मशविरा से बाहर रखे जाते हैं
Author: कल्याणी शंकर - Published 14-09-2017 11:54 UTC

मोदी मंत्रिमंडल के ताजा विस्तार में एक महिला को रक्षा मंत्री बनाए जाने की बात तो खूब हो रही है, लेकि इस बात पर चर्चा नहीं हो रही है कि इस बार के विस्तार में राजग सहयोगियों को पूरी तरह बाहर रखा गया है। गौरतलब हो कि राजग में भाजपा सहित कुल 32 पार्टियां शिरकत कर रही हैं और उनमे सभी को मंत्रिपरिषद में स्थान नहीं मिल पाया है।

जरूरी है रोहिंग्या समस्या का समाघान

विश्व समुदाय को कुछ न कुछ करना होगा
Author: उपेन्द्र प्रसाद - Published 12-09-2017 12:36 UTC

रोहिंग्या मुसलमानों का मसला अब भारत के लिए भी सिरदर्द साबित होने लगा है। यहां भी करीब 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं और उनको यहां से निकाले जाने को लेकर राजनीति हो रही है। हिन्दू संगठन उन्हें यहां से बाहर करने की मांग कर रहे है, तो मुस्लिम संगठन उन्हे शरण देने की फरियाद कर रहे हैं। मामला कोर्ट तक में पहुंच चुका है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक इस मामले मे कूद चुका है। कहा जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रावधानों के तहत भारत उन शरणार्थियों को यहां से जबर्दस्ती मरने के लिए बाहर नहीं भेज सकता।

SPECIAL OFFER

Get Your Website Today
Special offers are available for domain registration, transfer, assisted migration and all types of hosting services with free trials. You must try this service if you are not happy with your present hosting provider.
AnyPursuit Hosting Network

Article Topics

  1. अन्तर्राष्ट्रीय
  2. उपमहादेशीय
  3. महादेशीय
  4. राष्ट्रीय
  5. विविध